Monday, 11 March 2019

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Dard शायरी


सारा दिन गुजर जाता है खुद को समेटने में..
फिर रात को उसकी याद की हवा चलती है..
और हम फिर बिखर जाते है |
                                             ~दिनेश प्रजापति 

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